झूठी दुनिया में रहना दुश्वार हो गया लिरिक्स - मुकुल द्विवेदी | Jhoothi Duniya Mein Rehna Dushwar Ho Gaya Lyrics
- Get link
- X
- Other Apps
← पीछे जाएँ
॥ जय श्री राम ॥
झूठी दुनिया में रहना दुश्वार हो गया |
जबसे बांकेबिहारी जी से प्यार हो गया ||
1. बांके बिहारी जी के मोटे मोटे, कजरारे नैना |
नैनों ही नैनो में इकरार हो गया, जबसे बांके बिहारी जी से प्यार हो गया ||
2. बांके बिहारी जी की मीठी मुरलिया |
मुरली का तराना दिल के पार हो गया, जबसे बांके बिहारी जी से पार हो गया ||
3. बांके बिहारी जी का प्यारा वृन्दावन |
वृन्दावन मेरा घर द्वार हो गया, जबसे बांके बिहारी जी से प्यार हो गया ||
विशेष:- ठाकुर जी के 'पर्दे' और विग्रह का रहस्य: इस भजन में जिन "मोटे-मोटे कजरारे नैनों" का वर्णन है, उनसे जुड़ा एक ऐसा सत्य है जो बहुत कम लोग जानते हैं। वृन्दावन के श्री बांके बिहारी मंदिर में ठाकुर जी के सामने हर दो-तीन मिनट में जो पर्दा डाला और हटाया जाता है, उसके पीछे यही रहस्य है। संतों के अनुसार, बिहारी जी के नैनों में इतनी तीव्र सम्मोहन शक्ति (आकर्षण) है कि यदि कोई भक्त उनके कजरारे नैनों में लगातार आँखें डालकर देख ले, तो ठाकुर जी उसकी भक्ति के वश में होकर गर्भगृह छोड़कर उसके साथ ही चल देते हैं। इतिहास में ऐसा कई बार हुआ है, इसीलिए यह "इकरार" हमेशा पर्दे की ओट से होता है। "वृन्दावन मेरा घर द्वार हो गया" के पीछे का आध्यात्मिक सच: तीसरे अंतरे की यह पंक्ति ब्रज के 'परम विरक्त' संतों की स्थिति को दर्शाती है। ब्रज में इसे "कुंजवास" या "ब्रजवास" कहा जाता है। जब कोई जीवात्मा संसार के झूठे रिश्तों से थक जाती है, तब बिहारी जी की कृपा से उसे वृन्दावन की माटी में अपना असली घर दिखाई देने लगता है। यह महज़ एक कविता नहीं, बल्कि उन भक्तों का अनुभव है जो सब कुछ छोड़कर बिहारी जी की चौखट पर आ डटे।
॥ इति ॥
- Get link
- X
- Other Apps

Comments
Post a Comment