करुणा भरी नज़र से निहारो लाड़ली लिरिक्स - मुकुल द्विवेदी | Karuna Bhari Nazar Se Niharo Ladli Lyrics

पीछे जाएँ ॥ जय श्री राम ॥

Karuna Bhari Nazar Se Niharo Ladli Meri Rasna Se Radha Radha Nam Nikle Lyrics Mukul Dwivedi Hindi

करुणा भरी नज़र से निहारो लाड़ली लिरिक्स

 करुणा भरी नज़र से निहारो लाड़ली | निहारो लाड़ली, निहारो स्वामिनी | 1. हो ब्रज की निकुंज जैसा, मेरा ह्रदय सजा दो | इस कुञ्ज में निरंतर, बिहारो लाड़ली || करुणा भरी नज़र से..........| 2. कोई नहीं हमारा, तेरा नाम धाम प्यारा | हमको तो तेरे नाम को, सहारो लाड़ली || करुणा भरी नज़र से...| राधे राधे, राधे राधे, राधे राधे, राधे राधे, ............| मेरी रसना से राधा राधा नाम निकले | सुबह शाम निकले आठों याम निकले || राधा राधा राधा राधा ...........................| करुणा भरी नज़र से निहारो लाड़ली | विशेष:- 'आठों याम' का दिव्य आध्यात्मिक रहस्य: भजन की प्रसिद्ध कड़ी "सुबह शाम निकले आठों याम निकले" में आया शब्द 'याम' (प्रहर) समय की प्राचीन भारतीय गणना को दर्शाता है। एक 'याम' या प्रहर तीन घंटे का होता है, और पूरे दिन-रात में कुल 8 याम (24 घंटे) होते हैं। निकुंज उपासना के संतों के अनुसार, अष्टयाम सेवा का अर्थ है जीवन के हर क्षण में, चौबीसों घंटे केवल श्री जी के चरणों का ध्यान करना। यह पंक्ति जीवात्मा की निरंतर प्रभु-स्मरण की व्याकुलता को प्रकट करती है। "हृदय को निकुंज सजाने" का अर्थ: पहले अंतरे में भक्त प्रार्थना करता है— "मेरा हृदय सजा दो, इस कुंज में निरंतर बिहारो लाड़ली।" ब्रज के रसिक संत बताते हैं कि जब तक मनुष्य का हृदय काम, क्रोध और सांसारिक विकारों से मुक्त होकर वृन्दावन की 'कुंज' जैसा शांत और पवित्र नहीं हो जाता, तब तक साक्षात करुणा की मूर्ति श्री लाड़ली जी वहाँ वास नहीं करतीं। यह केवल एक कविता नहीं, बल्कि अंतःकरण की शुद्धि का मार्ग है।
॥ इति ॥

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