कोई तिरछी नज़र से न देखो लिरिक्स - मुकुल द्विवेदी | Koi Tirchi Nazar Se Na Dekho Lyrics - Radha Raman Bhajan
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॥ जय श्री राम ॥
कोई तिरछी नज़र से न देखो |
रमण मेरो छोटो सो, राधा रमण मेरो छोटो सो ||
1. रमन के मुखड़े पे वारि वारि जाऊँ |
कोई पलकें टिका के न देखो, रमण मेरो छोटो सो ||
2. मैया कनुआ कह के बुलावे, कनुआ दूर दूर ही जावे |
छवि मन में बसाकर तो देखो, रमण मेरो छोटो सो ||
कोई तिरछी नज़र से न देखो .............|
विशेष:- ठाकुर जी के श्रीअंग का रहस्य: बहुत कम लोग जानते हैं कि वृन्दावन के बाकी सात मुख्य देवालयों की तरह श्री राधा रमण जी के मंदिर में कोई अलग से 'राधा रानी' का विग्रह नहीं है। ठाकुर जी के बाईं ओर एक अत्यंत पवित्र स्वर्ण-पिंडी विराजमान है, जिसे ही राधा जी का स्वरूप मानकर पूजा जाता है। यह भजन उसी विग्रह के 'बाल-स्वरूप' को समर्पित है। 'कनुआ' शब्द के पीछे की कहानी: भजन के दूसरे अंतरे में आया शब्द 'कनुआ' कोई साधारण उपनाम नहीं है। ब्रज के संत बताते हैं कि जब कन्हैया बहुत छोटे थे और घुटनों के बल चलते थे, तब मैया यशोदा उन्हें प्यार से 'कनुआ' (यानी छोटा कान्हा) कहकर पुकारती थीं। इस भजन में सखियाँ कहती हैं कि ठाकुर जी आज भी उतने ही सुकुमार हैं, इसलिए उन्हें कोई 'तिरछी' या तीखी नज़रों से न देखे, कहीं ठाकुर जी डर कर छिप न जाएँ।
॥ इति ॥
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