ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने मंत्र अर्थ सहित | Om Krishnaya Vasudevaya Mantra Lyrics & Meaning
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॥ जय श्री राम ॥
|| ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने प्रणत: क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः ||
अर्थ :- वासुदेवनन्दन परमात्मा स्वरूपी भगवान श्रीकृष्णको वंदन है, उन गोविंदको पुनः नमन है, वे हमारे कष्टोंका नाश करें प्रणाम करने वालों के क्लेश का नाश करने वाले श्रीकृष्ण, वासुदेव, हरि, परमात्मा एवं गोविन्द के प्रति हमारा बार-बार नमस्कार है
विशेष:- सनातन धर्म में 'ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने' को दुखों और संकटों का नाश करने वाला एक परम सिद्ध महामंत्र माना गया है। यह दिव्य मंत्र श्रीमद्भागवत महापुराण के दिव्य भावों को समेटे हुए है। इस मंत्र में भगवान श्रीकृष्ण के पाँच पवित्र नामों—कृष्ण, वासुदेव, हरि, परमात्मा और गोविन्द का एक साथ संकीर्तन किया गया है। शास्त्रानुसार, 'प्रणत क्लेशनाशाय' का अर्थ है कि जो भी भक्त पूर्ण समर्पण के साथ प्रभु के चरणों में शीश झुकाता है, श्रीकृष्ण उसके मानसिक, शारीरिक और अध्यात्मिक (तीनों प्रकार के ताप और क्लेश) को जड़ से मिटा देते हैं। इस मंत्र का नियमित जाप या पठन करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, कुंडली के ग्रह दोष शांत होते हैं और अंतर्मन को असीम शांति मिलती है। सुबह के ब्रह्ममुहूर्त या संध्या वंदन के समय इस मंत्र का 108 बार जाप जीवन में सुख, समृद्धि और प्रभु भक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।
॥ इति ॥
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