आप आये नहीं और खबर भी न ली लिरिक्स - धन्वन्तरी दास जी | Aap Aaye Nahi Aur Khabar Bhi Na Li Lyrics
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॥ जय श्री राम ॥
आप आये नहीं, और खबर भी न ली
खत लिख लिख के भेजे तमाम, सुध ले लो मेरी घनश्याम ||
1. हम तो कन्हैया हुए तेरे ही दीवाने, चाहे तू माने या चाहे न माने |
आँखों में छाए मेरे दिल में समाये, बस होठों पे है तेरा नाम |
सुध ले लो मेरी घनश्याम ||
2. संग की सखिया हुईं तेरी ही दीवानी, दिन रात रोती रहें आखों से पानी |
देती सुनाई हमें मुरली सुहानी, गीत छेड़े बिरह के तमाम |
सुध ले लो मेरी घनश्याम ||
3. ओ वृन्दावन में रास रचाया, गोवेर्धन में गिरी को उठाया |
ब्रज गोपी का चीर चुराया, श्याम कैसा दिया है इनाम |
सुध ले लो मेरी घनश्याम ||
विशेष:- परम पूज्य संत श्री धन्वन्तरी दास जी महाराज (Dhanwantari Das Ji Maharaj) के पावन कंठ से सजा यह भजन 'आप आये नहीं, और खबर भी न ली' ब्रज रस के 'विरह भाव' (Separation) की पराकाष्ठा है। इस भजन में गोपियों और ब्रजवासियों की उस व्याकुलता को दर्शाया गया है, जब भगवान श्रीकृष्ण उन्हें छोड़कर मथुरा चले जाते हैं। भक्त अपनी दीनता प्रकट करते हुए कहता है कि हमने कन्हैया के वियोग में न जाने कितने 'खत' लिखे, लेकिन प्रभु ने अभी तक सुध नहीं ली। दूसरे अंतरे में "गीत छेड़े विरह के तमाम" जैसी पंक्तियाँ आत्मा की परमात्मा से मिलने की छटपटाहट को जीवंत करती हैं। महाराज जी की अनूठी और मर्मस्पर्शी गायकी के कारण यह भजन हर उस भक्त के हृदय को सजल कर देता है, जो ठाकुर जी के दर्शनों की आस में बैठा है। सावन, शरद पूर्णिमा और विरह संकीर्तनों में यह भजन भक्तों का परम प्रिय है।
॥ इति ॥
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