अकेली गई थी ब्रज में लिरिक्स - धन्वन्तरी दास जी | Akeli Gai Thi Braj Mein Lyrics

पीछे जाएँ ॥ जय श्री राम ॥

Akeli Gai Thi Braj Mein Mor Pankh Wala Mil Gaya Lyrics Dhanwantari Das Ji Maharaj Hindi

अकेली गई थी ब्रज में लिरिक्स

अकेली गई थी ब्रज में कोई नहीं था मेरे संग में, मोर पंख वाला मिल गया, - 2 1. नींद चुराई बंसी बजाके, चैन चुराया सैन चलाके, लगी आस मेरे मन में, गई थी में वृन्दावन में | बांसुरी वाला मिल गया, मोर पंख वाला मिल गया | श्याम प्यारे मुरली वाले, हम तुम्हारे हो गए |-2 मोर पंख वाला मिल गया |- 2 2. उसी ने बुलाया, उसी ने रुलाया, ऐसा सलोना श्याम मेरे मन भाया | टेढ़ी बाकी चल देखि, टेढ़ा मुकुट भी देखा, टेढ़ी टांग वाला मिल गया | मोरपंख वाला मिल गया | श्याम प्यारे मुरली वाले, हम तुम्हारे हो गए |-2 मोर पंख वाला मिल गया |- 2 3. बांके बिहारी मेरे हिये में बसाऊं, तेरे बिना श्याम सुन्दर कहाँ चैन पाऊं | लगन लगी तन मन में, ढूंढ रही में निधि वन में, कामरी वाला मिल गया | मोरपंख वाला मिल गया | श्याम प्यारे मुरली वाले, हम तुम्हारे हो गए |-2 मोर पंख वाला मिल गया................ | विशेष:- परम पूज्य संत श्री धन्वन्तरी दास जी महाराज (Dhanwantari Das Ji Maharaj) के पावन कंठ से सजा यह भजन 'अकेली गई थी ब्रज में' गोपी-भाव और ठाकुर जी के चित्तचोर स्वरूप का एक अत्यंत सुंदर रस-रंग है। इस भजन में एक जीवात्मा रूपी गोपी ब्रज और निधि वन की कुंज-गलियों में अपने अकेलेपन और ठाकुर जी से हुई उस जादुई मुलाकात का वर्णन करती है। भगवान श्री कृष्ण के 'त्रिभंगी स्वरूप' का बहुत ही अनूठे और ठेठ ब्रज अंदाज़ में वर्णन किया गया है, जहाँ उनका मुकुट, उनकी चाल और उनकी टांग (त्रिभंगी मुद्रा) सब कुछ टेढ़ा है, फिर भी वह मन को अति सुहाता है। भजन का उत्तरार्ध "श्याम प्यारे मुरली वाले, हम तुम्हारे हो गए" पूर्ण शरणागति को दर्शाता है। सावन के झूलों, रास उत्सवों और वृंदावन की परिक्रमा के समय यह भजन भक्तों को आनंद से सराबोर कर देता है। ॥ इति ॥

Comments

सबसे ज्यादा पसंद किये गए भजन

आरती कुंजबिहारी की लिरिक्स हिंदी में | Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics in Hindi (Original)