दर्ज़ी सीमदे निशान मन्ने खाटू जाना से लिरिक्स - राज पारीक | Darji Seemde Nishan Manne Khatu Jaana Se Lyrics
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॥ जय श्री राम ॥
दर्ज़ी सीमदे निशान, मन्ने खाटू जाना से |
खाटू वाले श्याम धनि से, हेत पुराना से ||
1. कितनो मीटर कपड़ो ल्याऊँ, कुणसो ल्याऊं रंग |
लहरावे जद आसमान में, दुनिया हो जाये दंग |
बोल दरजी बोल मन्ने क्या क्या लाना से |
दर्ज़ी सीमदे निशान, मन्ने खाटू जाना से |
2. लाम्बी लाम्बी लाठी माहि, बाबा को निशान |
बिन बोल्या ही समझे दुनिया, करदे एक बिछाण |
झंडे ऊपर मन्ने जय श्री श्याम लिखाना से |
दर्ज़ी सीमदे निशान, मन्ने खाटू जाना से |
3. हाथ जोड़ कर बोलू दरजी दिखा तेरी चतुराई |
बनवारी जो भी माँगेगो, द्यूंगा तने सिबाई |
मेले माहि जाके, मन्ने श्याम रिझाना से |
दर्ज़ी सीमदे निशान, मन्ने खाटू जाना से |
4. मेरे मन में भाव जाग गया, में भी खाटू जाऊ |
घर वाला से सागे लेकर, एक निशान चड़ाउ |
श्याम धणी से मन्ने भी, एक काम पटाना से |
दर्ज़ी सीमदे निशान, मन्ने खाटू जाना से |
दर्ज़ी सीमदे निशान, मन्ने खाटू जाना से ..............|
विशेष:- 'निशान' (झंडे) का दिव्य इतिहास और रहस्य: खाटू श्याम जी में चढ़ाया जाने वाला 'निशान' कोई साधारण कपड़ा या झंडा नहीं है। यह बाबा श्याम के महा-बलिदान का प्रतीक है, जो महाभारत काल में उन्होंने भगवान श्री कृष्ण को अपने शीश के रूप में दिया था। संतों के अनुसार, निशान में मुख्य रूप से केसरिया, लाल या चमकीला रंग का ही उपयोग होता है, जो शौर्य और वैराग्य को दर्शाता है। भजन के दूसरे अंतरे में आई लाइन "लाम्बी लाम्बी लाठी माहि, बाबा को निशान" उसी पावन बांस (लाठी) को दर्शाती है, जिसे श्रद्धा से लेकर भक्त मीलों पैदल चलकर खाटू धाम पहुँचते हैं। 'बनवारी' छाप और समर्पण का भाव: तीसरे अंतरे में आया शब्द "बनवारी जो भी माँगेगो, द्यूंगा तने सिबाई" श्याम जगत के प्रसिद्ध रचनाकार 'बनवारी जी' की छाप को दर्शाता है। ब्रज और मारवाड़ की लोक-मान्यता है कि जब कोई भक्त दर्जी से निशान सिलवाता है, तो वह उसे साधारण मजदूरी नहीं बल्कि सवाई (सवा गुना खुश होकर) बख्शिश देता है, क्योंकि वह दर्जी साक्षात श्याम सुंदर के लिए वस्त्र तैयार कर रहा होता है।
॥ इति ॥
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