हाथों में लेके निशान चला रे लिरिक्स - राज पारीक | Hatho Mein Leke Nishan Chala Re Lyrics |

पीछे जाएँ ॥ जय श्री राम ॥

Hatho Mein Leke Nishan Chala Re Mujhe Khatu Wale Shyam Ka Lyrics Raj Pareek Hindi

हाथों में लेके निशान चला रे लिरिक्स

शेर :-हवाओं के इशारे से पैगाम आ रहे हैं | दुनिया भर से लोग तमाम आ रहे हैं || खुशनसीबी हमारी की हमें भी बुलावा आया है | लेकर के हाथों में निशान हम भी खाटूधाम आ रहे हैं || -:भजन:- जब जब भी बुलावा आता है मुझे खाटू वाले श्याम का | में रोक न पता हु खुद को ये कैसा नसा है श्याम का || में छोड़ दू सातों सुख भी और छोड़ दू सब आराम | में तोड़ के सरे बंधन और छोड़ के सारे काम || वो बुला रहा कैसे रोक लू , में तो चला खाटूधाम -खाटूधाम , हाथों में लेके निशान चला रे, में तो अपने बाबा के धाम चला रे || 1. अपने मन की क्या बोलू सब उसके मन की होती है | वो ही जा पाते हैं खाटू जिनपर कृपा होती है | वो लुटा रहा कैसे छोड़ दू, में तो चला खाटूधाम-खाटूधाम, हाथों में लेके निशान चला रे, में तो अपने बाबा के धाम चला रे || 2. श्याम निशान चढ़ाना प्यारे बड़े भाग्य की बात है | रींगस से खाटू तक बाबा चलता तेरे साथ है | वो चला रहा कैसे न चलूँ , में तो चला खाटूधाम-खाटूधाम, हाथों में लेके निशान चला रे, में तो अपने बाबा के धाम चला रे || वो बुला रहा कैसे रोक लू , में तो चला खाटूधाम -खाटूधाम , हाथों में लेके निशान चला रे, में तो अपने बाबा के धाम चला रे || विशेष:- रींगस से खाटू की दूरी का रहस्य: दूसरे अंतरे में आया शब्द 'रींगस' श्याम भक्तों के लिए एक तीर्थ की तरह है। रींगस से खाटू धाम की दूरी लगभग 17 से 18 किलोमीटर है। मान्यता है कि जो भक्त रींगस से हाथ में निशान (ध्वज) लेकर नंगे पैर पैदल यात्रा शुरू करता है, बाबा श्याम उसकी पूरी यात्रा में अदृश्य रूप से उसके साथ चलते हैं और उसके पैरों के छालों और दर्द को खुद हर लेते हैं। इसी भाव को राज पारीक जी ने गाया है— "रींगस से खाटू तक बाबा चलता तेरे साथ है।" निशान यात्रा और मानसिक 'नशा' का विज्ञान: भजन की मुख्य टेक है— "मैं रोक न पाता हूँ खुद को ये कैसा नशा है श्याम का।" संतों के अनुसार, फागुन मेले के समय जब लाखों भक्त एक साथ 'जय श्री श्याम' की गूँज करते हैं, तो वातावरण में एक ऐसी दिव्य ऊर्जा (Vibes) पैदा होती है जो इंसानी दिमाग के तनाव को पूरी तरह खत्म कर देती है। यही कारण है कि भक्त दुनिया के "सातों सुख और आराम" छोड़कर खिंचा चला आता है। ॥ इति ॥

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