कैसे न इठलाऊँ मैं बरसाना मिला है लिरिक्स - पूर्णिमा दीदी | Kaise Na Ithlaun Mein Barsana Mila Hai Lyrics
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॥ जय श्री राम ॥
कैसे न इठलाऊँ में बरसाना मिला है
बरसाना मिला है रहजाना मिला है
जीना मिला है मरजाना मिला है
कैसे न इठलाऊँ में ........|
1. जप तप साधन के बस की नहीं है
केवल किशोरी जी की करुणा भई है |
रोम रोम ये खिला है बरसाना मिला है |
2. सोचने से पहले होता प्रबंध है
कैसे बताऊ आनंद ही आनंद है |
शिकवा न कोई गिला है बरसाना मिला है |
वृंदावन वारी राधा, मोहन मनमानी राधा,
ओ नीली साडी राधा, ओ सभी प्यारी राधा,
ओ माथे रोरी राधा, सुभग सठोरी राधा,
सर्व सुख दायिनी राधा, प्रीतम प्रेमवाली राधा,
हे हंसगामिनी राधा, ओ रजत रमिणी राधा,
ओ खन सो खाली राधा, ओ भोली भाली राधा,
ओ रास की प्याली राधा, ओ नीली साडी राधा,
ओ दूल्हा दुल्हिन राधा, ओ सदा सुहागिन राधा,
ओ सदा सुहागिन राधा, सौभाग्य नवेली राधा,
अनुराग सुवेळी राधा .|
कैसे न इठलाऊ में बरसाना मिला है |
अब न छुपाउंगी सबको बताउंगी,
तुझको कसम से में अपना बनाउंगी
राधा रमन मेरा यार
ओये मेरा दिल तेरा आशिक़ |
शेर :- इश्क़ नहीं होता है सभी के लिए ये होता है किसी किसी के लिए
सिर्फ सर झुकाना ही इबादत नहीं होती थोड़ी आशिक़ी भी चाहिए बंदगी के लिए ||
अब न छुपाउंगी सबको बताउंगी,
तुझको कसम से में अपना बनाउंगी
राधा रमन मेरा यार
ओये मेरा दिल तेरा आशिक़ |
विशेष:- ब्रज संकीर्तन की महारानी पूज्य पूर्णिमा दीदी (Purnima Didi) द्वारा गाया गया यह अद्भुत संकीर्तन 'कैसे न इठलाऊँ मैं बरसाना मिला है' श्री लाड़ली जी (श्री राधा रानी) के महल और बरसाने की पावन भूमि के प्रति परम गौरव का प्रतीक है। इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि श्री राधा रानी का धाम और उनका प्रेम किसी जप, तप या साधन से नहीं मिलता, यह तो केवल 'किशोरी जी की अहैतुकी करुणा' से ही सुलभ होता है। भजन के बीच में आई अद्भुत राधा नाम-वली (जैसे— नीली साड़ी राधा, भोली भाली राधा, सदा सुहागिन राधा) भक्तों के अंतर्मन में राधा नाम रस का संचार करती है। शेर की पंक्तियाँ "सिर्फ सर झुकाना ही इबादत नहीं होती, थोड़ी आशिकी भी चाहिए बंदगी के लिए" यह स्पष्ट करती हैं कि प्रभु की प्राप्ति केवल नियमों से नहीं, बल्कि रसिक पागलपन और अनन्य प्रेम से होती है।
॥ इति ॥
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