करुणामयी कृपा कीजिये श्री राधे लिरिक्स - चित्र विचित्र | Karunamayi Kripa Kijiye Shri Radhe Lyrics - Chitra Vichitra
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॥ जय श्री राम ॥
करुणामयी कृपा कीजिये, श्री राधे |
चरणों से लगा लीजिये, श्री राधे ||
1. देके चरणों की सेवा मुझे, श्री राधे |
मेरी किस्मत बना दीजिये ||
करुणामयी ..............|
जय राधा, राधा, श्री राधा, जय राधा, राधा श्री राधा |
जय राधा, राधा, श्री राधा, जय राधा, राधा श्री राधा |
2. बीच मजधार में आ फंसी, श्री राधे |
पार नैया लगा दीजिये ||
करुणामयी .............|
जय राधा, राधा, श्री राधा, जय राधा, राधा श्री राधा |
जय राधा, राधा, श्री राधा, जय राधा, राधा श्री राधा |
3. छोड़ दर तेरा जाये कहाँ लाड़ली जू |
वृन्दावन में बसा लीजिये ||
करुणामयी.................|
जय राधा, राधा, श्री राधा, जय राधा, राधा श्री राधा |
जय राधा, राधा, श्री राधा, जय राधा, राधा श्री राधा |
4. कहें चित्र विचित्र लाड़ली श्री राधे |
अपने काबिल बना लीजिये ||
करुणामयी.................|
जय राधा, राधा, श्री राधा, जय राधा, राधा श्री राधा |
जय राधा, राधा, श्री राधा, जय राधा, राधा श्री राधा |
विशेष:- वृंदावन की पावन भूमि के अनन्य श्री राधा नाम संकीर्तन प्रणेता पूज्य चित्र विचित्र जी महाराज (Chitra Vichitra Ji Maharaj) के कंठ से निकला यह भजन 'करुणामयी कृपा कीजिये, श्री राधे' ब्रज रस का साक्षात स्वरूप है। इस भजन में एक व्याकुल भक्त किशोरी जी (श्री राधा रानी) के चरणों में गिरकर अपने जीवन की नैया को 'मझधार' से पार लगाने की करुण पुकार लगा रहा है। भजन की अंतिम पंक्तियों में "कहें चित्र विचित्र लाड़ली श्री राधे, अपने काबिल बना लीजिये" भक्त की परम दीनता और समर्पण को दर्शाता है। जब भी वृंदावन की परिक्रमा या संकीर्तन में यह भजन गूंजता है, तो हर आंख सजल हो उठती है। राधा अष्टमी और कार्तिक मास के दौरान इंटरनेट पर इस भजन की डिमांड बहुत ज्यादा बढ़ जाती है।
॥ इति ॥
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