किसी से उनकी मंजिल का पता पाया नहीं जाता लिरिक्स - धन्वन्तरी दास जी | Kisi Se Unki Manzil Ka Pata Lyrics
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॥ जय श्री राम ॥
किसी से उनकी मंजिल का पता पाया नहीं जाता
जहाँ है वो, फ़रिश्तो का वहां, साया नहीं जाता
1. मोहब्बत के लिए कुछ खास दिल मकसूद होते हैं
ये वो नगमा है जो हर साज पे गाया नहीं जाता |
2. मेरे टूटे हुए पैरो तलक का मुझ पे अहसान है
तेरे दर से उठ के अब कहीं जाया नहीं जाता |
3. मोहब्बत की नहीं जाती मोहब्बत हो ही जाती है
ये शोला खुद भड़कता है इसे भड़काया नहीं जाता |
विशेष:- परम पूज्य संत श्री धन्वन्तरी दास जी महाराज (Dhanwantari Das Ji Maharaj) के पावन कंठ से सजा यह भजन 'किसी से उनकी मंजिल का पता पाया नहीं जाता' ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम (इश्क-ए-हकीकी) और पूर्ण शरणागति का साक्षात स्वरूप है। इस भजन की शैली सूफ़ी संतों और रसिकों के सूक्तियों जैसी है। इसमें बताया गया है कि परमात्मा का परम धाम तर्क और बुद्धि से परे है, जहाँ सामान्य बुद्धि तो क्या 'फ़रिश्तों का साया' भी नहीं पहुँच सकता। भजन का सबसे प्रसिद्ध अंश "मोहब्बत की नहीं जाती, मोहब्बत हो ही जाती है" यह स्पष्ट करता है कि ठाकुर जी से प्रेम कोई प्रयास या दिखावा नहीं है, बल्कि यह अंतरात्मा में स्वतः स्फूर्त होने वाला एक दिव्य शोला है। महाराज जी की शांत, गंभीर और मर्मस्पर्शी गायकी के कारण यह भजन हर उस भक्त के दिल को छू लेता है जो संसार से उदास होकर ठाकुर जी के चरणों में आश्रय ढूंढ रहा है।
॥ इति ॥
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