कृपा की न होती जो आदत तुम्हारी लिरिक्स - विनोद अग्रवाल | Kripa Ki Na Hoti Jo Aadat Tumhari Lyrics - Vinod Agrawal

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Kripa Ki Na Hoti Jo Aadat Tumhari Gopal Muraliya Wale Lyrics Vinod Agrawal Hindi

कृपा की न होती जो आदत तुम्हारी लिरिक्स

गोपाल मुरलिया वाले नन्दलाल मुरलिया वाले | श्री राधा जीवन नील मणि गोपाल मुरलिया वाले || कृपा की न होती जो आदत तुम्हारी, तो सुनी ही रहती अदालत तुम्हारी, गरीबो के दिल में जगह तुम न पाते, तो किस दिल में होती हिफाजत तुम्हारी | गरीबों की दुनिया है आबाद तुमसे, हम गरीबों से है बादशाहत तुम्हारी, न मुल्जिम ही होते न तुम होते हाकिम, न घर घर में होती इबादत तुम्हारी | तुम्हारी ही करुणा के दृग बिंदु हैं ये, तुम्हे सौंपते है अमानत तुम्हारी, कृपा की न होती जो आदत तुम्हारी, तो सुनी ही रहती अदालत तुम्हारी || गोपाल मुरलिया वाले नन्दलाल मुरलिया वाले | विशेष:- परम पूज्य विनोद अग्रवाल जी (Vinod Agrawal Ji) के मुखारविंद से निकला यह अद्भुत भजन 'कृपा की न होती जो आदत तुम्हारी' केवल एक गीत नहीं, बल्कि ठाकुर जी से किया गया एक बेहद खूबसूरत और लाडला संवाद है। इस भजन में जो गज़ल और सूफियाना अंदाज़ पिरोया गया है, वह सीधे आत्मा को झकझोर देता है। इसमें भक्त प्रभु से बड़े अधिकार के साथ कहता है कि "यदि आपके भीतर करुणा और कृपा करने की आदत न होती, तो आपकी यह अदालत सूनी ही रहती।" गरीबों और मजलूमों पर दया करने वाले 'नीलमणि गोपाल' की महिमा को विनोद अग्रवाल जी ने जिस तड़प और उमंग के साथ गाया है, वह हर संकीर्तन प्रेमी की आँखों को सजल कर देता है। इंटरनेट और यूट्यूब पर आज भी इस भजन की सर्च और लोकप्रियता सबसे ऊपर बनी हुई है। 
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