लीले पे चढ़ के आयो सांवलियो सरकार लिरिक्स - राज पारीक | Leele Pe Chadh Ke Aayo Sanwliyo Sarkar Lyrics
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॥ जय श्री राम ॥
लीले पे चढ़ के, यो घोड़े पे चढ़ के |
आयो सांवलियो सरकार लीले पे चढ़ के ||
1. मूछों की मरोड़, कैसे रॉब है निरालो |
घूंघर वाला बाल, म्हारो सांवरो रुखालो |
तो लीले की ताप टप-टप खड़के |
आयो सांवलियो सरकार लीले पे चढ़ के ||
2. केसरियो है बाको, जामे फेतो पचरंगो |
मोरपंख जयपुरी, रुमाल है सुरंगो |
मुडक निहारो तने जीव भरके |
आयो सांवलियो सरकार लीले पे चढ़ के ||
3. बांकी सी लटक पर, बाबरो दीवानो |
मन में मगन, मेरो जीव मस्तानो |
तो नहीं कोई दुसरो, तेरे से बढ़ के |
आयो सांवलियो सरकार लीले पे चढ़ के ||
4. वीर हनुमान के निशान एक हाथ में |
पवन कुमार सोहे, सांवरे के साथ में |
देख के सवारी अंग अंग फड़के |
आयो सांवलियो सरकार लीले पे चढ़ के ||
5. श्याम बहादुर, शिव आरती उतारे |
अरज गुजारें, बाबा तन मन वारें |
आ गया दयालु दाता दया करके |
आयो सांवलियो सरकार लीले पे चढ़ के ||
लीले पे चढ़ के, यो घोड़े पे चढ़ के |
आयो सांवलियो सरकार लीले पे चढ़ के ||
विशेष:- 'श्याम बहादुर जी' और आरती का ऐतिहासिक सच: पांचवें अंतरे में आई लाइन— "श्याम बहादुर, शिव आरती उतारे" —श्याम इतिहास के सबसे पवित्र पन्ने को दर्शाती है। श्री श्याम बहादुर जी खाटू धाम के वो परम अनन्य भक्त थे, जिन्होंने खाटू श्याम जी की सुप्रसिद्ध 'श्री श्याम आरती' (ॐ जय श्री श्याम हरे...) की रचना की थी। वे जब भी बाबा की आरती गाते थे, तो साक्षात बाबा श्याम के विग्रह में से मंद-मंद मुस्कान और झंकार सुनाई देती थी। राज पारीक जी ने इस भजन में उन्हीं महान रसिक को श्रद्धांजलि दी है। वीर हनुमान और सांवरे का संबंध: चौथे अंतरे में वर्णन है— "वीर हनुमान के निशान एक हाथ में, पवन कुमार सोहे सांवरे के साथ में।" बहुत कम लोग जानते हैं कि खाटू श्याम जी (बर्बरीक) को भगवान श्री कृष्ण ने कलियुग में पूजे जाने का वरदान दिया था, और कलियुग के दो ही सबसे जाग्रत देव हैं— बाबा श्याम और वीर हनुमान। खाटू धाम की निशान यात्रा में हनुमान जी के ध्वज का साथ चलना भक्त के भीतर अपार शक्ति और सुरक्षा का संचार करता है।
॥ इति ॥
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