शिव कैलाशों के वासी लिरिक्स - हंसराज रघुवंशी | Shiv Kailashon Ke Vasi Lyrics - Hansraj Raghuwanshi
- Get link
- X
- Other Apps
← पीछे जाएँ
॥ जय श्री राम ॥
शिव कैलाशों के वासी, धोड़ी धारों के राजा |
शंकर संकट हरना |
1. तेरे कैलाशों का अंत न पाया, अंत बे अंत तेरी माया |
शिव कैलाशों के वासी .............|
2. बेल की पत्तीयां भांग धतूरा, शिव जी के मन को लुभाये |
शिव कैलाशों के वासी..............|
3. एक था डेरा तेरा, चंबरे चौगाना, दूजा लाई दिता भर मोरा |
शिव कैलाशों के वासी ............|
विशेष:- 'डमरू वाले' हंसराज रघुवंशी (Hansraj Raghuwanshi) जी के करियर का सबसे मील का पत्थर साबित होने वाला यह भजन 'शिव कैलाशों के वासी, धोड़ी धारों के राजा' मूल रूप से एक पारंपरिक हिमाचली पहाड़ी लोक भजन है। इस भजन में भोलेनाथ के भव्य स्वरूप, उनकी रहस्यमयी माया और कैलाश पर्वत पर उनके निवास का बहुत ही सुंदर वर्णन है। "चम्बरे चौगाना" जैसी पंक्तियाँ सीधे हिमाचल प्रदेश की पावन संस्कृति और चम्बा घाटी के इतिहास को दर्शाती हैं। हंसराज जी की अनूठी और कड़क आवाज ने इस लोकगीत को आज के युवाओं के बीच 'Trance' और 'Bhakti' का एक अद्भुत मिश्रण बना दिया है। सावन के महीने, महाशिवरात्रि या सोमवार के व्रत के दिन इस भजन की सर्च वॉल्यूम इंटरनेट पर रिकॉर्ड तोड़ देती है।
॥ इति ॥
- Get link
- X
- Other Apps

Comments
Post a Comment