श्री गंगा माता आरती लिरिक्स हिंदी में | ॐ जय गंगे माता | Shri Ganga Mata Aarti Lyrics in Hindi (Om Jai Gange Mata)

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श्री गंगा माता आरती लिरिक्स

 ॐ जय गंगे माता,मैया जय गंगे माता। जो नर तुमको ध्याता,मनवांछित फल पाता॥ ॐ जय गंगे माता॥ चन्द्र-सी ज्योति तुम्हारी,जल निर्मल आता। शरण पड़े जो तेरी,सो नर तर जाता॥ ॐ जय गंगे माता॥ पुत्र सगर के तारे,सब जग को ज्ञाता। कृपा दृष्टि हो तुम्हारी,त्रिभुवन सुख दाता॥ ॐ जय गंगे माता॥ एक बार जो प्राणी,शरण तेरी आता। यम की त्रास मिटाकर,परमगति पाता॥ ॐ जय गंगे माता॥ आरती मातु तुम्हारी,जो नर नित गाता। सेवक वही सहज में,मुक्ति को पाता॥ ॐ जय गंगे माता॥ विशेष:- पतित पावनी माँ गंगा की यह दिव्य आरती उनके निर्मल स्वरूप और उनके द्वारा दिए जाने वाले मोक्ष का गुणगान करती है, जिसका श्रद्धापूर्वक पाठ करने से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं और उसे परमगति की प्राप्ति होती है। शास्त्रों के अनुसार माँ गंगा की कृपा दृष्टि त्रिभुवन को सुख देने वाली है और जिस प्रकार उन्होंने महाराज सगर के साठ हजार पुत्रों का उद्धार किया था, उसी प्रकार जो भी प्राणी एक बार उनकी शरण में आता है, उसके यम की त्रास (यमदूतों का भय) मिट जाती है। गंगा माता की आरती की चंद्र के समान शीतल ज्योति भक्तों के हृदय में शांति भर देती है, जिससे सेवक सहज ही सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर मुक्ति को प्राप्त कर लेता है। प्रतिदिन इस आरती का गायन करने से न केवल मानसिक शुद्धता आती है, बल्कि भक्त की हर मनोकामना माँ की असीम अनुकम्पा से पूर्ण हो जाती है।
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