जय शनि देवा | श्री शनि देव आरती लिरिक्स हिंदी में | Shri Shani Dev Aarti Lyrics in Hindi (Jai Shani Deva)
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॥ जय श्री राम ॥
जय शनि देवा, जय शनि देवा,
जय जय जय शनि देवा ।
अखिल सृष्टि में कोटि-कोटि जन,
करें तुम्हारी सेवा ।
जय शनि देवा, जय शनि देवा,
जय जय जय शनि देवा ॥
जा पर कुपित होउ तुम स्वामी,
घोर कष्ट वह पावे ।
धन वैभव और मान-कीर्ति,
सब पलभर में मिट जावे ।
राजा नल को लगी शनि दशा,
राजपाट हर लेवा ।
जय शनि देवा, जय शनि देवा,
जय जय जय शनि देवा ॥
जा पर प्रसन्न होउ तुम स्वामी,
सकल सिद्धि वह पावे ।
तुम्हारी कृपा रहे तो,
उसको जग में कौन सतावे ।
ताँबा, तेल और तिल से जो,
करें भक्तजन सेवा ।
जय शनि देवा, जय शनि देवा,
जय जय जय शनि देवा ॥
हर शनिवार तुम्हारी,
जय-जय कार जगत में होवे ।
कलियुग में शनिदेव महात्तम,
दु:ख दरिद्रता धोवे ।
करू आरती भक्ति भाव से,
भेंट चढ़ाऊं मेवा ।
जय शनि देवा, जय शनि देवा,
जय जय जय शनि देवा ॥
॥ श्री शनि देव आरती-2 ॥
चार भुजा तहि छाजै,
गदा हस्त प्यारी ।
जय शनिदेव जी ॥
रवि नन्दन गज वन्दन,
यम अग्रज देवा ।
कष्ट न सो नर पाते,
करते तब सेवा ॥
जय शनिदेव जी ॥
तेज अपार तुम्हारा,
स्वामी सहा नहीं जावे ।
तुम से विमुख जगत में,
सुख नहीं पावे ॥
जय शनिदेव जी ॥
नमो नमः रविनन्दन,
सब ग्रह सिरताजा ।
बन्शीधर यश गावे,
रखियो प्रभु लाजा ॥
जय शनिदेव जी ॥
विशेष:- न्याय के देवता भगवान शनि देव की यह आरती उनके शक्तिशाली और न्यायप्रिय स्वरूप का वर्णन करती है, जिसका श्रद्धापूर्वक गान करने से भक्तों के जीवन से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैया के नकारात्मक प्रभाव समाप्त हो जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार शनि देव कर्मों के आधार पर फल देते हैं और जो भक्त शनिवार के दिन ताँबा, तेल और तिल चढ़ाकर उनकी सेवा करते हैं, उन पर प्रभु की विशेष कृपा बनी रहती है जिससे जग में उन्हें कोई सता नहीं पाता। इस आरती के नियमित पाठ से न केवल राजा नल की भांति खोया हुआ मान-सम्मान और वैभव वापस प्राप्त किया जा सकता है, बल्कि कलियुग में यह दु:ख और दरिद्रता को धोने का सबसे उत्तम मार्ग है। जो भी मनुष्य भक्ति भाव से शनि देव की आरती उतारता है और उन्हें फल-मेवा अर्पित करता है, प्रभु उसके सभी कष्टों को हर लेते हैं और उसे सकल सिद्धियों के साथ सुखद जीवन का वरदान प्रदान करते हैं।
॥ इति ॥
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