तुझे देख के दिल भरता ही नहीं लिरिक्स - धन्वन्तरी दास जी | Tujhe Dekh Ke Dil Bharta Hi Nahi Lyrics
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॥ जय श्री राम ॥
-:शेर:-
कजरारी तेरी आँखों में क्या भरा हुआ कुछ टोना है |
तेरा तो हंसन औरों का मरण, बस जान उसे खोना है ||
क्या खूबी हुस्न बयान करूँ, तू सुन्दर श्याम सलोना है |
श्यामा सखी के प्राण धन जीवन, ब्रज का एक खिलौना है ||
आ पिया इन नैनं में पलक ढांक तोहे लू |
ना मैं देखूँ जग को, न तोहे देखन दूँ ||
-: भजन :-
तुझे देख के दिल भरता ही नहीं, अब जाऊं कहाँ में सांवरिया |
पिया छोड़ गए, दिल तोड़ गए, अब बनके फिरूं में बाबरिया ||
1. तिरछी चितवन बांकी है अदा, तेरे नैन कटीले कजरारे |
अब तेरे बिना जी लगता नहीं, अब काहे सताए सांवरिया |
तुझे देख के दिल...............|
3. तेरी मीठी मीठी तानों पर, दिल मेरा कन्हैया खोने लगा |
अब आके सुना दो बांसुरिया,अब मिल भी जाओ सांवरिया |
तुझे देख के दिल...............|
3. सावन की मस्त बहारों में, दिल रो रो मेरा तड़प गया |
मेरे नैना ऐसा बरस रहे, जैसे सावन की हो बादरिया |
तुझे देख के दिल...............|
विशेष:- परम पूज्य संत श्री धन्वन्तरी दास जी महाराज (Dhanwantari Das Ji Maharaj) के पावन कंठ से सजा यह भजन 'तुझे देख के दिल भरता ही नहीं' साक्षात गोपी-गीत और विरह-रस का एक दिव्य मिश्रण है। भजन की शुरुआत में दिया गया शेर भगवान श्रीकृष्ण के 'कजरारे नैनों' और उनके 'त्रिभंगी हुस्न' की ऐसी महिमा गाता है, जहाँ प्रभु का मुस्कुराना भी भक्त के लिए 'प्राण हरने' जैसा मीठा अनुभव बन जाता है। दोहे की पंक्तियाँ "ना मैं देखूँ जग को, न तोहे देखन दूँ" अनन्य प्रेम की उस पराकाष्ठा को दर्शाती हैं जहाँ भक्त अपने आराध्य को अपने नैनों की कोठरी में बंद कर लेना चाहता है। तीसरे अंतरे में विरह की तुलना 'सावन की बादरिया' से की गई है, जो आत्मा की परमात्मा से मिलने की परम व्याकुलता को जीवंत करती है। महाराज जी की अत्यंत भावुक और गंभीर गायकी के कारण यह भजन हर उस भक्त के लिए एक औषधि की तरह है, जिसका मन ठाकुर जी के वियोग में तड़प रहा है।
॥ इति ॥
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