धनुष राम ने तोड़ा है लिरिक्स - मैथिली ठाकुर | Dhanush Ram Ne Toda Hai Lyrics - Maithili Thakur
- Get link
- X
- Other Apps
← पीछे जाएँ
॥ जय श्री राम ॥
तोडा है भाई, तोडा है, सीता से नाता जोड़ा है |
तुम उठो सिया श्रृंगार करो, अब धनुष राम ने तोडा है |
1. माथ सिया के टिका सोहे, कुण्डल की छवि न्यारी है |
अरे न्यारी है न्यारी है, रघुवर को जानकी प्यारी है |
तुम उठो सिया श्रृंगार करो.......|
2. सुन हर्षित भई , सखी सहेली शिव धनुष राम में तोडा है |
तोडा है भाई, तोडा है, सीता से नाता जोड़ा है |
तुम उठो सिया श्रृंगार करो.......|
3. हाथ सिया के कंगन सोहे, टीके की छवि न्यारी है |
अरे न्यारी है न्यारी है, रघुवर को जानकी प्यारी है |
तुम उठो सिया श्रृंगार करो.......|
विशेष:- मिथिला की लोक-परंपरा और विवाह का मर्म: यह सिर्फ एक भजन नहीं है, बल्कि सदियों पुराना एक पारंपरिक 'विवाह गीत' (Mithila Vivah Geet) है। जब राजा जनक के दरबार में प्रभु श्री राम ने पिनाक (शिव धनुष) को उठाया और उसकी प्रत्यंचा चढ़ाते ही वह बीच से टूट गया, तब पूरे जनकपुर में खुशियों की लहर दौड़ गई थी। सखियाँ दौड़ती हुई माता सीता के पास जाती हैं और कहती हैं— "तुम उठो सिया श्रृंगार करो, अब धनुष राम ने तोड़ा है"। यह भजन उस परम आनंद के क्षण को जीवंत कर देता है। शरण और पूर्ण समर्पण का भाव: भजन की पंक्तियाँ "रघुवर को जानकी प्यारी है" जीव और परमात्मा के मिलन का प्रतीक हैं। सनातनी ग्रंथों के अनुसार, शिव धनुष का टूटना वास्तव में मनुष्य के 'अहंकार' के टूटने का प्रतीक है। जब तक अहंकार रहता है, तब तक आत्मा (सीता) का मिलन परमात्मा (राम) से नहीं हो सकता। जैसे ही राम जी ने धनुष तोड़ा, सारे व्यवधान खत्म हो गए और अटूट नाता जुड़ गया।
॥ इति ॥
- Get link
- X
- Other Apps
.webp)
Comments
Post a Comment