राम को देखकर श्री जनकनंदनी लिरिक्स - मैथिली ठाकुर | Ram Ko Dekhkar Shri Janaknandini Lyrics

पीछे जाएँ ॥ जय श्री राम ॥

Ram Ko Dekhkar Shri Janaknandini Bagh Me Ja Khadi Ki Khadi Reh Gayi Lyrics Maithili Thakur

राम को देखकर श्री जनकनंदनी लिरिक्स

 राम को देखकर श्री जनकनंदनी, बाग में जा खड़ी की खड़ी रह गई | राम देखे सिया माँ सिया राम को, अखियां लड़ी की लड़ी रह गयीं | 1. थे जनकपुर गए देखने के लिए, सारी सखियाँ झरोखन से झाँकन लगी | देखते ही नज़र मिल गयी दोनों की, जो जहाँ थी खड़ी की खड़ी रह गयी | राम को देखकर..........| 2. बोली है एक सखी राम को देखकर, रच दियें हैं विधाता ने जोड़ी सुधर | पर धनुष कैसे तोड़ेंगे वारे कुंवर, सबमें शंका बनी की बनी रह गयी | राम को देखकर............| 3. बोली दूजी सखी छोट देखन में है, पर चमत्कार इनका नहीं जानती | एक ही बाण में तड़का राक्षसी, उठ सकी न पड़ी की पड़ी रह गयी | राम को देखकर.............| विशेष:- पुष्प वाटिका प्रसंग का अमर वर्णन: यह भजन गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित 'रामचरितमानस' के बालकाण्ड के उस पावन प्रसंग पर आधारित है, जब माता सीता गौरी पूजन के लिए जनकपुर के बाग में जाती हैं और प्रभु श्री राम भी भाई लक्ष्मण के साथ वहाँ पुष्प लेने पहुँचते हैं। भजनों के संतों के अनुसार, जब दोनों की आँखें मिलीं, तो वह कोई साधारण आकर्षण नहीं था; वह सदियों बाद प्रकृति (सीता) का पुरुष (राम) से अलौकिक मिलन था। इसीलिए लिखा गया— "जो जहाँ थी खड़ी की खड़ी रह गयी"। सखियों की शंका और प्रभु का प्रताप: भजन के दूसरे और तीसरे अंतरे में सखियों के बीच का बड़ा ही सुंदर संवाद है। एक सखी को चिंता है कि सुकुमार राम जी इतना भारी शिव धनुष कैसे तोड़ेंगे— "वारे कुंवर, सबमें शंका बनी की बनी रह गयी"। वहीं दूसरी सखी प्रभु के वास्तविक अवतार को पहचानती है और याद दिलाती है कि देखने में छोटे हैं पर एक ही बाण में ताड़का जैसी राक्षसी का वध कर दिया था। यह दृश्य भक्ति और विश्वास की जीत को दर्शाता है।    ॥ इति ॥

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