श्याम चंदा हैं श्यामा चकोरी लिरिक्स - मैथिली ठाकुर | Shyam Chanda Hain Shyama Chakori Lyrics
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॥ जय श्री राम ॥
श्याम चंदा हैं श्यामा चकोरी, बड़ी सुन्दर है दोनों की जोड़ी |
1. श्याम रसिया है, राधा रसीली, श्याम छलिया है, राधा शर्मीली |
श्याम नटखट है, राधा हैं भोरी, बड़ी सुन्दर है दोनों की जोड़ी |
श्याम चंदा हैं श्यामा चकोरी.....|
2. दोनों में प्रेम इतना है ज्यादा, राधा मोहन हैं मोहन है राधा |
कृष्ण काला है राधा हैं गोरी, बड़ी सुन्दर है दोनों की जोड़ी |
श्याम चंदा हैं श्यामा चकोरी.....|
3. कृष्ण गोपाल गोकुल का राजा, बृज की सरकार रानी हैं राधा |
चिरजीवी ये दोनों की जोड़ी, बड़ी सुन्दर है दोनों की जोड़ी |
श्याम चंदा हैं श्यामा चकोरी.....|
विशेष:- 'चंदा और चकोरी' के रूपक का गहरा अर्थ: इस भजन की मुख्य लाइन "श्याम चंदा हैं श्यामा चकोरी" सनातन दर्शन के एक बहुत ही गहरे रस को प्रकट करती है। 'चकोर' एक ऐसा पक्षी होता है जो सिर्फ और सिर्फ चांद को देखता रहता है, चाहे उसकी गर्दन में दर्द हो जाए या रात बीत जाए। यहाँ राधा जी को 'चकोरी' कहकर संतों ने यह दर्शाया है कि जैसे चकोर पक्षी चांद के बिना नहीं रह सकता, वैसे ही श्री राधा जी की हर सांस और हर सोच केवल श्री कृष्ण के इर्द-गिर्द घूमती है। "राधा मोहन हैं, मोहन हैं राधा" का अद्वैत दर्शन: दूसरे अंतरे की यह पंक्ति— "दोनों में प्रेम इतना है ज्यादा, राधा मोहन हैं मोहन है राधा"—यह बताती है कि दोनों दो शरीर ज़रूर हैं, लेकिन दोनों की आत्मा एक ही है। शास्त्रों के अनुसार, कृष्ण ही राधा हैं और राधा ही कृष्ण हैं। जब कृष्ण बांसुरी बजाते हैं, तो वह राधा का नाम पुकारती है, और जब राधा मुस्कुराती हैं, तो उसमें कृष्ण का अक्स दिखता है।
॥ इति ॥
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